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mahabharat 7.110.5: तत्पश्चात् पराक्रमी द्रोणाचार्य ने युद्धभूमि में ध्यान लगाकर स्वर्ण पंख वाले पाँच तीखे बाणों से युयुधान को तुरन्त घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.110.5 
द्रोणोऽपि युधि विक्रान्तो युयुधानं समाहित:।
अविध्यत् पञ्चभिस्तूर्णं हेमपुङ्खै: शरै: शितै:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पराक्रमी द्रोणाचार्य ने युद्धभूमि में ध्यान लगाकर स्वर्ण पंख वाले पाँच तीखे बाणों से युयुधान को तुरन्त घायल कर दिया।
 
Then the mighty Dronacharya, concentrating on the battlefield, instantly wounded Yuyudhan with five sharp arrows having golden feathers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)