Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.110.49: हे शैनय! जो मनुष्य अपने मित्र के लिए युद्ध करते हुए अपना शरीर त्याग देता है और जो सम्पूर्ण पृथ्वी ब्राह्मणों को दान कर देता है, वे दोनों समान पुण्य प्राप्त करते हैं। | mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यो हि शैनेय मित्रार्थे युध्यमानस्त्यजेत् तनुम्।
पृथिवीं च द्विजातिभ्यो यो दद्यात् स समो भवेत्॥ ४९॥
अनुवाद
हे शैनय! जो मनुष्य अपने मित्र के लिए युद्ध करते हुए अपना शरीर त्याग देता है और जो सम्पूर्ण पृथ्वी ब्राह्मणों को दान कर देता है, वे दोनों समान पुण्य प्राप्त करते हैं।
O Shainayya! One who sacrifices his body while fighting for the sake of his friend and one who donates the entire earth to brahmins, both attain equal merit. 49.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥