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mahabharat 7.110.48: आप सत्यनिष्ठ, वीर योद्धा और मित्रों को आश्रय देने वाले हैं। वीर! आप अपने कर्मों के कारण संसार में सत्यवादी के रूप में विख्यात हैं। 48.   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.110.48 
त्वं हि सत्यव्रत: शूरो मित्राणामभयङ्कर:।
लोके विख्यायसे वीर कर्मभि: सत्यवागिति॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
आप सत्यनिष्ठ, वीर योद्धा और मित्रों को आश्रय देने वाले हैं। वीर! आप अपने कर्मों के कारण संसार में सत्यवादी के रूप में विख्यात हैं। 48.
 
You are a man of truth, a brave warrior and one who gives protection to friends. Brave! You are renowned in the world as a truthful person because of your deeds. 48.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)