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mahabharat 7.110.47: हे पुरुषोत्तम! अर्जुन तुम्हारा भाई, मित्र और गुरु है। वह युद्धभूमि में संकट में है। अतः तुम्हें उसकी सहायता करनी चाहिए। 47.   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.110.47 
स त्वं भ्रातुर्वयस्यस्य गुरोरपि च संयुगे।
कुरु कृच्छ्रे सहायार्थमर्जुनस्य नरर्षभ॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषोत्तम! अर्जुन तुम्हारा भाई, मित्र और गुरु है। वह युद्धभूमि में संकट में है। अतः तुम्हें उसकी सहायता करनी चाहिए। 47.
 
Best of men! Arjun is your brother, friend and teacher. He is in trouble on the battlefield. Therefore, you should try to help him. 47.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)