Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.110.44: मेरे मत में जो व्यक्ति सदैव प्रसन्नचित्त रहता है और जो सदैव अपने प्रति स्नेहशील रहता है, उसे संकट के समय महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए नियुक्त करना चाहिए ॥ 44॥ | mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यो हि प्रीतमना नित्यं यश्च नित्यमनुव्रत:।
स कार्ये साम्पराये तु नियोज्य इति मे मति:॥ ४४॥
अनुवाद
मेरे मत में जो व्यक्ति सदैव प्रसन्नचित्त रहता है और जो सदैव अपने प्रति स्नेहशील रहता है, उसे संकट के समय महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए नियुक्त करना चाहिए ॥ 44॥
In my opinion, a person who is always cheerful and who is always affectionate towards oneself should be appointed to perform an important task in times of crisis. ॥ 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥