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mahabharat 7.110.4: उस समय सात्यकि ने अचानक आये महारथी द्रोणाचार्य पर पच्चीस बाण चलाये।   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.110.4 
तमापतन्तं सहसा भारद्वाजं महारथम्।
सात्यकि: पञ्चविंशत्या क्षुद्रकाणां समार्पयत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उस समय सात्यकि ने अचानक आये महारथी द्रोणाचार्य पर पच्चीस बाण चलाये।
 
At that time Satyaki shot twenty-five arrows at the suddenly arriving great warrior Dronacharya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)