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mahabharat 7.110.36: जब वह भयंकर युद्ध चल रहा था, जिसमें अनेक महान योद्धा नष्ट हो गए थे, तब अचानक कुंतीपुत्र युधिष्ठिर को पाञ्चजन्य की ध्वनि सुनाई दी।   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.110.36 
वर्तमाने तथा रौद्रे तस्मिन् वीरवरक्षये।
अशृणोत् सहसा पार्थ: पाञ्चजन्यस्य नि:स्वनम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
जब वह भयंकर युद्ध चल रहा था, जिसमें अनेक महान योद्धा नष्ट हो गए थे, तब अचानक कुंतीपुत्र युधिष्ठिर को पाञ्चजन्य की ध्वनि सुनाई दी।
 
While that dreadful battle which destroyed many great warriors was going on, suddenly Yudhishthira, the son of Kunti, heard the sound of Panchajanya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)