Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.110.31: महाराज! सौ केकय योद्धाओं को मारकर तथा शेष सैनिकों को सब ओर भगाकर द्रोणाचार्य यमराज के समान मुँह खोले खड़े हो गये। | mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
केकयानां शतं हत्वा विद्राव्य च समन्तत:।
द्रोणस्तस्थौ महाराज व्यादितास्य इवान्तक:॥ ३१॥
अनुवाद
महाराज! सौ केकय योद्धाओं को मारकर तथा शेष सैनिकों को सब ओर भगाकर द्रोणाचार्य यमराज के समान मुँह खोले खड़े हो गये।
Maharaj! After killing a hundred Kekaya warriors and driving away the remaining soldiers in all directions, Dronacharya stood like Yamaraja with his face open.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥