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mahabharat 7.110.3: हे महाराज! जब द्रोणाचार्य ने युधान के कारण अपनी सेना को पीड़ित होते देखा, तब उन्होंने स्वयं महाबली सत्यरक्षक पर आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.110.3 
वध्यमानं बलं दृष्ट्वा युयुधानेन मारिष।
अभ्यद्रवत् स्वयं द्रोण: सात्यकिं सत्यविक्रमम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे महाराज! जब द्रोणाचार्य ने युधान के कारण अपनी सेना को पीड़ित होते देखा, तब उन्होंने स्वयं महाबली सत्यरक्षक पर आक्रमण किया।
 
Honorable King! When Dronacharya saw his army suffering due to Yuudhaan, he himself attacked the mighty Satya keeper. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)