Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.110.28: जिस प्रकार सूर्य की किरणें सब दिशाओं में फैलकर गर्मी प्रदान करती हैं, उसी प्रकार द्रोणाचार्य के विशाल बाण सब दिशाओं में फैलकर शत्रुओं को पीड़ा पहुँचाते हुए दिखाई दे रहे थे। | mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रोणस्य च व्यदृश्यन्त विसर्पन्तो महाशरा:।
गभस्तय इवार्कस्य प्रतपन्त: समन्तत:॥ २८॥
अनुवाद
जिस प्रकार सूर्य की किरणें सब दिशाओं में फैलकर गर्मी प्रदान करती हैं, उसी प्रकार द्रोणाचार्य के विशाल बाण सब दिशाओं में फैलकर शत्रुओं को पीड़ा पहुँचाते हुए दिखाई दे रहे थे।
Just as the rays of the Sun spread in all directions providing heat, in the same manner the huge arrows of Dronacharya were seen spreading in all directions and tormenting the enemies.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥