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mahabharat 7.110.27: उस समय द्रोणाचार्य के आक्रमण से पाण्डव और संजय सैनिक कीचड़ में फंसे हुए हाथियों के समान हो गये, जिन्हें कोई रक्षक न मिला।   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.110.27 
वध्यमाना महाराज पाण्डवा: सृञ्जयास्तथा।
त्रातारं नाध्यगच्छन्त पङ्कमग्ना इव द्विपा:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
उस समय द्रोणाचार्य के आक्रमण से पाण्डव और संजय सैनिक कीचड़ में फंसे हुए हाथियों के समान हो गये, जिन्हें कोई रक्षक न मिला।
 
At that time, the Pandavas and the Sanjaya soldiers, being attacked by Dronacharya, were like elephants stuck in the mud, unable to find any protector. 27.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)