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mahabharat 7.110.26: शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ द्रोणाचार्य ने उन समस्त धनुर्धरों को अपने बाणों से उसी प्रकार पीड़ा देना आरम्भ किया, जैसे सूर्य अपनी किरणों से संसार को पीड़ा पहुँचाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.110.26 
तांस्तु सर्वान् महेष्वासान् द्रोण: शस्त्रभृतां वर:।
अतापयच्छरव्रातैर्गभस्तिभिरिवांशुमान्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ द्रोणाचार्य ने उन समस्त धनुर्धरों को अपने बाणों से उसी प्रकार पीड़ा देना आरम्भ किया, जैसे सूर्य अपनी किरणों से संसार को पीड़ा पहुँचाते हैं।
 
Dronacharya, the best among weapon holders, began tormenting all those great archers with his arrows in the same way as the sun with its rays torments the world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)