Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.110.23-24: राजन! जिस प्रकार घर में अतिथियों का स्वागत जल और आसन देकर किया जाता है, उसी प्रकार द्रोणाचार्य ने भी उन सभी आक्रमणकारी योद्धाओं का मुस्कराकर स्वागत किया। जिस प्रकार अतिथि सत्कार में निपुण गृहस्थ के घर आकर संतुष्ट होते हैं, उसी प्रकार धनुर्धर द्रोणाचार्य के बाणों से वे सभी पूर्णतः संतुष्ट हुए। | mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजन! जिस प्रकार घर में अतिथियों का स्वागत जल और आसन देकर किया जाता है, उसी प्रकार द्रोणाचार्य ने भी उन सभी आक्रमणकारी योद्धाओं का मुस्कराकर स्वागत किया। जिस प्रकार अतिथि सत्कार में निपुण गृहस्थ के घर आकर संतुष्ट होते हैं, उसी प्रकार धनुर्धर द्रोणाचार्य के बाणों से वे सभी पूर्णतः संतुष्ट हुए।
King! Just as guests are welcomed by offering water and a seat to their home, similarly Dronacharya himself welcomed all those attacking warriors with a smile. Just as guests are satisfied by visiting the house of a householder who is adept in hospitality, similarly all of them were satisfied to the fullest by the arrows of archer Dronacharya.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥