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mahabharat 7.110.14-15h: वीरों! जैसे राहु सूर्य को ग्रस लेता है, उसी प्रकार वृष्णिवंश का यह महारथी सात्यकि के द्वारा रणभूमि में वीर द्रोणाचार्य के द्वारा मृत्यु के मुख में जाना चाहता है। अतः तुम सब दौड़कर उस स्थान पर जाओ, जहाँ सात्यकि युद्ध कर रहे हैं। 14 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  7.110.14-15h 
एष वृष्णिवरो वीर: सात्यकि: सत्यविक्रम:।
ग्रस्यते युधि वीरेण भानुमानिव राहुणा॥ १४॥
अभिद्रवत गच्छध्वं सात्यकिर्यत्र युध्यते।
 
 
अनुवाद
वीरों! जैसे राहु सूर्य को ग्रस लेता है, उसी प्रकार वृष्णिवंश का यह महारथी सात्यकि के द्वारा रणभूमि में वीर द्रोणाचार्य के द्वारा मृत्यु के मुख में जाना चाहता है। अतः तुम सब दौड़कर उस स्थान पर जाओ, जहाँ सात्यकि युद्ध कर रहे हैं। 14 1/2॥
 
Warriors! Just as Rahu engulfs the Sun, in the same way this great warrior of Vrishni dynasty wants to go into the face of death through the brave Dronacharya in the battlefield of Satyaki. Therefore, you all run and go to the place where Satyaki fights. 14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)