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mahabharat 7.110.13: भरत! उनकी गर्जना सुनकर और सात्यकि को पीड़ित देखकर राजा युधिष्ठिर ने अपने सब सैनिकों से कहा -॥13॥   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.110.13 
तं श्रुत्वा निनदं घोरं पीडॺमानं च माधवम्।
युधिष्ठिरोऽब्रवीद् राजा सर्वसैन्यानि भारत॥ १३॥
 
 
अनुवाद
भरत! उनकी गर्जना सुनकर और सात्यकि को पीड़ित देखकर राजा युधिष्ठिर ने अपने सब सैनिकों से कहा -॥13॥
 
Bharata! Hearing their roar and seeing Satyaki in pain, King Yudhishthira said to all his soldiers -॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)