Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.110.12: हे प्रजा की रक्षा करने वाले राजा! उसे उस अवस्था में देखकर आपके पुत्र और सैनिक अत्यन्त प्रसन्न हुए और बारम्बार गर्जना करने लगे॥12॥   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.110.12 
तं तु सम्प्रेक्ष्य ते पुत्रा: सैनिकाश्च विशाम्पते।
प्रहृष्टमनसो भूत्वा सिंहवद् व्यनदन् मुहु:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजा की रक्षा करने वाले राजा! उसे उस अवस्था में देखकर आपके पुत्र और सैनिक अत्यन्त प्रसन्न हुए और बारम्बार गर्जना करने लगे॥12॥
 
O King who protects his subjects! Seeing him in that condition, your sons and soldiers became very happy and started roaring repeatedly. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)