Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.110.11: नरेश्वर! द्रोणाचार्य को युद्धस्थल पर तीखे बाणों की वर्षा करते देख युयुधान का मुख उदास हो गया।   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.110.11 
विषण्णवदनश्चापि युयुधानोऽभवन्नृप।
भारद्वाजं रणे दृष्ट्वा विसृजन्तं शितान् शरान्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! द्रोणाचार्य को युद्धस्थल पर तीखे बाणों की वर्षा करते देख युयुधान का मुख उदास हो गया।
 
Nareshwar! Seeing Dronacharya showering sharp arrows on the battlefield, Yuyudhan's face became sad.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)