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mahabharat 7.110.102-103h: हे वीर! मेरी बात मानकर तुम मूर्ख दुर्योधन की इस सेना में प्रवेश करो ॥102 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 102-103h
 
 
श्लोक  7.110.102-103h 
एतद् वचनमाज्ञाय मम सत्यपराक्रम॥ १०२॥
प्रविशैतद् बलं तात धार्तराष्ट्रस्य दुर्मते:।
 
 
अनुवाद
हे वीर! मेरी बात मानकर तुम मूर्ख दुर्योधन की इस सेना में प्रवेश करो ॥102 1/2॥
 
True brave man! You should accept my words and enter this army of foolish Duryodhana. 102 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)