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mahabharat 7.110.100-101h: इन दोनों कारणों को जानकर ही मैं तुमसे यह कार्य करने के लिए कह रहा हूँ। मेरी बात को अनसुना मत करना; क्योंकि मैं तुम्हारे गुरु का भी गुरु हूँ।   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 100-101h
 
 
श्लोक  7.110.100-101h 
कारणद्वयमेतद्धि जानंस्त्वामहमब्रुवम्॥ १००॥
मावमंस्था वचो मह्यं गुरुस्तव गुरोर्ह्यहम्।
 
 
अनुवाद
इन दोनों कारणों को जानकर ही मैं तुमसे यह कार्य करने के लिए कह रहा हूँ। मेरी बात को अनसुना मत करना; क्योंकि मैं तुम्हारे गुरु का भी गुरु हूँ।
 
Knowing these two reasons, I am asking you to do this work. Do not ignore my words; because I am the guru of your guru as well. 100 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)