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mahabharat 7.110.10: प्रजानाथ! युद्धभूमि में द्रोणाचार्य द्वारा घायल होने पर सात्यकि कुछ भी न कर सके।   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.110.10 
स वध्यमान: समरे भारद्वाजेन सात्यकि:।
नान्वपद्यत कर्तव्यं किञ्चिदेव विशाम्पते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! युद्धभूमि में द्रोणाचार्य द्वारा घायल होने पर सात्यकि कुछ भी न कर सके।
 
Prajanath! Satyaki could not do anything after being wounded by Dronacharya in the battlefield. 10.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)