Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.11.51: अतः जब यह अवश्यंभावी, अपार, चिन्ताजनक और महान् संकट उपस्थित हुआ, तब जो कुछ और कैसे हुआ, वह मुझे बताइए ॥ 51॥   |   mahabharat अध्याय 7.11: धृतराष्ट्रका भगवान् श्रीकृष्णकी संक्षिप्त लीलाओंका वर्णन करते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 11: धृतराष्ट्रका भगवान् श्रीकृष्णकी संक्षिप्त लीलाओंका वर्णन करते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  7.11.51 
तस्मादपरिहार्येऽर्थे सम्प्राप्ते कृच्छ्र उत्तमे।
अपारणीये दुश्चिन्त्ये यथाभूतं प्रचक्ष्व मे॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
अतः जब यह अवश्यंभावी, अपार, चिन्ताजनक और महान् संकट उपस्थित हुआ, तब जो कुछ और कैसे हुआ, वह मुझे बताइए ॥ 51॥
 
Therefore, when this inevitable, immense, worrying and great crisis occurred, tell me whatever happened and how. ॥ 51॥
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि द्रोणाभिषेकपर्वणि धृतराष्ट्रविलापे एकादशोऽध्याय:॥ ११॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत द्रोणाभिषेकपर्वमें धृतराष्ट्रविलापविषयक ग्यारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)