Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.11.44-45h: ऐसा प्रतीत होता है कि न तो ब्रह्मचर्य पालन से, न वेदों के स्वाध्याय से, न अनुष्ठान करने से, न शस्त्रों के प्रयोग से कोई भी अपने आपको मृत्यु से बचा सकता है । 44 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.11: धृतराष्ट्रका भगवान् श्रीकृष्णकी संक्षिप्त लीलाओंका वर्णन करते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न ह्येव ब्रह्मचर्येण न वेदाध्ययनेन च॥ ४४॥
न क्रियाभिर्न चास्त्रेण मृत्यो: कश्चिन्निवार्यते।
अनुवाद
ऐसा प्रतीत होता है कि न तो ब्रह्मचर्य पालन से, न वेदों के स्वाध्याय से, न अनुष्ठान करने से, न शस्त्रों के प्रयोग से कोई भी अपने आपको मृत्यु से बचा सकता है । 44 1/2॥
It seems that no one can save himself from death, neither by following celibacy, nor by self-study of the Vedas, nor by performing rituals, nor by the use of weapons. 44 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥