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mahabharat 7.11.42-43h: उनकी आत्मा एक है; परन्तु इस पृथ्वी पर मनुष्यों को वे दो शरीर प्रतीत होते हैं। उन्हें मन से भी नहीं हराया जा सकता। वे तेजस्वी श्रीकृष्ण और अर्जुन चाहें तो मेरी सेना को क्षण भर में नष्ट कर सकते हैं; परन्तु मनुष्य स्वभाव के कारण वे ऐसा नहीं चाहते। ॥42 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.11: धृतराष्ट्रका भगवान् श्रीकृष्णकी संक्षिप्त लीलाओंका वर्णन करते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 11: धृतराष्ट्रका भगवान् श्रीकृष्णकी संक्षिप्त लीलाओंका वर्णन करते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना  »  श्लोक 42-43h
 
 
श्लोक  7.11.42-43h 
एकात्मानौ द्विधाभूतौ दृश्येते मानवैर्भुवि।
मनसाऽपि हि दुर्धर्षौ सेनामेतां यशस्विनौ॥ ४२॥
नाशयेतामिहेच्छन्तौ मानुषत्वाच्च नेच्छत:।
 
 
अनुवाद
उनकी आत्मा एक है; परन्तु इस पृथ्वी पर मनुष्यों को वे दो शरीर प्रतीत होते हैं। उन्हें मन से भी नहीं हराया जा सकता। वे तेजस्वी श्रीकृष्ण और अर्जुन चाहें तो मेरी सेना को क्षण भर में नष्ट कर सकते हैं; परन्तु मनुष्य स्वभाव के कारण वे ऐसा नहीं चाहते। ॥42 1/2॥
 
Their soul is one; but to the humans on this earth they appear as two bodies. They cannot be defeated even by the mind. If those glorious Sri Krishna and Arjuna wish, they can destroy my army instantly; but due to following human nature they do not wish so. ॥ 42 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)