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mahabharat 7.11.4: इसी प्रकार वहाँ भयंकर कर्म करने वाला एक राक्षस बैल के रूप में रहता था, जो गायों के लिए मृत्यु के समान प्रतीत होता था। श्रीकृष्ण ने उसे भी बाल्यकाल में अपने हाथों से मार डाला॥4॥   |   mahabharat अध्याय 7.11: धृतराष्ट्रका भगवान् श्रीकृष्णकी संक्षिप्त लीलाओंका वर्णन करते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.11.4 
दानवं घोरकर्माणं गवां मृत्युमिवोत्थितम्।
वृषरूपधरं बाल्ये भुजाभ्यां निजघान ह॥ ४॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार वहाँ भयंकर कर्म करने वाला एक राक्षस बैल के रूप में रहता था, जो गायों के लिए मृत्यु के समान प्रतीत होता था। श्रीकृष्ण ने उसे भी बाल्यकाल में अपने हाथों से मार डाला॥4॥
 
Similarly, a demon performing horrible deeds lived there in the form of a bull, who appeared like death to the cows. Shri Krishna killed him too with his own hands in his childhood. ॥4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)