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mahabharat 7.11.3: यमुना के तट पर वन में अश्वराज केशी रहता था, जो श्रवा के समान पराक्रमी और वायु के समान वेगवान था। श्रीकृष्ण ने उसका वध कर दिया॥3॥   |   mahabharat अध्याय 7.11: धृतराष्ट्रका भगवान् श्रीकृष्णकी संक्षिप्त लीलाओंका वर्णन करते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.11.3 
उच्चै:श्रवस्तुल्यबलं वायुवेगसमं जवे।
जघान हयराजं तं यमुनावनवासिनम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
यमुना के तट पर वन में अश्वराज केशी रहता था, जो श्रवा के समान पराक्रमी और वायु के समान वेगवान था। श्रीकृष्ण ने उसका वध कर दिया॥3॥
 
In the forest on the banks of Yamuna, there lived the horse king Keshi, who was as powerful as Shrava and as fast as the wind. Shri Krishna killed him. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)