श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 109: घटोत्कचद्वारा अलम्बुषका वध और पाण्डव-सेनामें हर्ष-ध्वनि  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  7.109.22-23h 
ते शरा नतपर्वाणो विविशू राक्षसं तदा॥ २२॥
रुषिता: पन्नगा यद्वद् गिरिशृङ्गं महाबला:।
 
 
अनुवाद
जैसे क्रोध में भरा हुआ महाबली सर्प पर्वत की चोटी पर चढ़ जाता है, उसी प्रकार अलम्बुष के वे धनुषाकार गाँठवाले बाण उस समय घटोत्कच के शरीर में घुस गए॥22 1/2॥
 
Just as a mighty serpent, filled with rage, climbs to the peak of a mountain, in the same way those bowed knotted arrows of Alambusha entered the body of Ghatotkacha at that time. 22 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)