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mahabharat 7.108.44: उन्होंने बड़े हर्ष से भरकर महाबली भीमसेन की ऐसी ही स्तुति की, जैसे मरुद्गणों ने युद्ध में प्रह्लाद को हराकर आए हुए इन्द्रदेव की स्तुति की थी॥44॥   |   mahabharat अध्याय 7.108: द्रौपदीपुत्रोंके द्वारा सोमदत्तकुमार शलका वध तथा भीमसेनके द्वारा अलम्बुषकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 108: द्रौपदीपुत्रोंके द्वारा सोमदत्तकुमार शलका वध तथा भीमसेनके द्वारा अलम्बुषकी पराजय  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  7.108.44 
अपूजयन् मारुतिं च संहृष्टास्ते महाबलम्।
प्रह्रादं समरे जित्वा यथा शक्रं मरुद्‍गणा:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने बड़े हर्ष से भरकर महाबली भीमसेन की ऐसी ही स्तुति की, जैसे मरुद्गणों ने युद्ध में प्रह्लाद को हराकर आए हुए इन्द्रदेव की स्तुति की थी॥44॥
 
Filled with great joy, he praised the mighty Bhimsen as fervently as the Marudganas had praised Lord Indra, who had come after defeating Prahlad in the battle. 44॥
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि अलम्बुषपराजये अष्टाधिकशततमोऽध्याय:॥ १०८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें अलम्बुषकी पराजयविषयक एक सौ आठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)