श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 108: द्रौपदीपुत्रोंके द्वारा सोमदत्तकुमार शलका वध तथा भीमसेनके द्वारा अलम्बुषकी पराजय  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.108.2 
ते पीडिता भृशं तेन रौद्रेण सहसा विभो।
प्रमूढा नैव विविदुर्मृधे कृत्यं स्म किंचन॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! उस भयंकर योद्धा द्वारा अत्यन्त पीड़ित होकर वे सहसा मोहग्रस्त हो गए और समझ नहीं पाए कि इस समय युद्ध में हमारा क्या कर्तव्य है॥2॥
 
O Lord! Being greatly tormented by that fierce warrior, they suddenly became bewildered and could not understand what our duty is in the war at this time.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)