श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.106.5 
सर्वे द्रोणरथं प्राप्य पञ्चाला: पाण्डवै: सह।
तदनीकं बिभित्सन्तो महास्त्राणि व्यदर्शयन्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों सहित समस्त पांचाल द्रोणाचार्य के रथ के पास गये और उनकी सेना की व्यूहरचना को भेदने की इच्छा से बड़े-बड़े अस्त्र-शस्त्रों का प्रदर्शन करने लगे।
 
All the Panchalas along with the Pandavas went near Dronacharya's chariot and began displaying large weapons with the desire to break through his army's formation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)