श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन  »  श्लोक 46-47h
 
 
श्लोक  7.106.46-47h 
हतो राजा हतो राजा भारद्वाजेन मारिष॥ ४६॥
इत्यासीत् सुमहाञ्छब्द: पाण्डुसैन्यस्य भारत।
 
 
अनुवाद
भरत! माननीय महाराज! पाण्डवों की सेना में बड़ा शोर मच गया कि 'राजा मारा गया, राजा मारा गया।'
 
Bharata! Honorable King! There was a great uproar in Pandava's army that 'The king has been killed, the king has been killed.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)