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mahabharat 7.106.41-42h: फिर उसने भाला चलाकर उसका धनुष काट डाला, एक भाले से उसकी इन्द्र ध्वजा के समान ध्वजा काट डाली और तीन बाणों से पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  7.106.41-42h 
चिच्छेदैकेन भल्लेन धनुश्चेन्द्रध्वजोपमम्॥ ४१॥
केतुमेकेन चिच्छेद पाण्डवं चार्दयत् त्रिभि:।
 
 
अनुवाद
फिर उसने भाला चलाकर उसका धनुष काट डाला, एक भाले से उसकी इन्द्र ध्वजा के समान ध्वजा काट डाली और तीन बाणों से पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर को घायल कर दिया।
 
Then he shot a spear and cut off his bow. With one spear he cut off his flag which was like the flag of Indra and with three arrows he hurt Yudhishthira, the son of Pandu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)