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mahabharat 7.106.36-37h: तत्पश्चात् उन्होंने युद्धभूमि में द्रोणाचार्य को मुड़ी हुई गांठों वाले पांच बाणों से घायल कर दिया तथा तीक्ष्ण छुरे से उनके विशाल धनुष को काट डाला।   |   mahabharat अध्याय 7.106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  7.106.36-37h 
विद्‍ध्वा तं च रणे द्रोणं पञ्चभिर्नतपर्वभि:॥ ३६॥
क्षुरप्रेण सुतीक्ष्णेन चिच्छेदास्य महद् धनु:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन्होंने युद्धभूमि में द्रोणाचार्य को मुड़ी हुई गांठों वाले पांच बाणों से घायल कर दिया तथा तीक्ष्ण छुरे से उनके विशाल धनुष को काट डाला।
 
Thereafter, he wounded Dronacharya on the battlefield with five arrows having bent knots, and cut off his huge bow with a sharp razor.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)