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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन
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श्लोक 34-35h
श्लोक
7.106.34-35h
तदस्त्रं भस्मसात्कृत्वा तां शक्तिं घोरदर्शनाम्॥ ३४॥
जगाम स्यन्दनं तूर्णं पाण्डवस्य यशस्विन:।
अनुवाद
वह अस्त्र उस भयंकर शक्ति को भस्म करता हुआ तुरन्त ही महाबली युधिष्ठिर के रथ की ओर बढ़ा ॥34 1/2॥
That weapon, incinerating that fierce looking power, immediately moved towards the chariot of the illustrious Yudhishthira. 34 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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