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mahabharat 7.106.31: रणभूमि में धर्मराज द्वारा उठाई गई शक्ति को देखकर समस्त प्राणियों ने सहसा कहा - 'द्रोणाय स्वस्ति (द्रोणाचार्य का कल्याण हो)' ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 7.106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.106.31 
शक्तिं समुद्यतां दृष्ट्वा धर्मराजेन संयुगे।
स्वस्ति द्रोणाय सहसा सर्वभूतान्यथाब्रुवन्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
रणभूमि में धर्मराज द्वारा उठाई गई शक्ति को देखकर समस्त प्राणियों ने सहसा कहा - 'द्रोणाय स्वस्ति (द्रोणाचार्य का कल्याण हो)' ॥31॥
 
Seeing the power raised by Dharmaraja in the battlefield, all the living beings suddenly said - 'Dronaya Swasti (may Dronacharya be well)'. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)