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mahabharat 7.106.3: माननीय राजा! पांचाल सैनिक द्रोण को मार डालने की इच्छा से प्रसन्न होकर जोर से गर्जना करने लगे और उन पर बाणों की वर्षा करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.106.3 
पञ्चाला हि जिघांसन्तो द्रोणं संहृष्टचेतस:।
अभ्यमुञ्चन्त गर्जन्त: शरवर्षाणि मारिष॥ ३॥
 
 
अनुवाद
माननीय राजा! पांचाल सैनिक द्रोण को मार डालने की इच्छा से प्रसन्न होकर जोर से गर्जना करने लगे और उन पर बाणों की वर्षा करने लगे।
 
Honorable King! The Panchala soldiers, delighted with the desire to kill Drona, roared loudly and began showering arrows upon him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)