Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.106.28-29: राजन! उस युद्धस्थल में क्रोध से लाल-लाल नेत्रों वाले युधिष्ठिर ने द्रोणाचार्य के उन बाणों को काट डाला और हाथ में एक भाला लिया, जो पर्वतों को भी भेद सकता था। उसमें एक सोने की छड़ और आठ घंटियाँ लगी हुई थीं। उस अत्यंत भयानक भाले ने हृदय में भय उत्पन्न कर दिया। | mahabharat अध्याय 7.106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजन! उस युद्धस्थल में क्रोध से लाल-लाल नेत्रों वाले युधिष्ठिर ने द्रोणाचार्य के उन बाणों को काट डाला और हाथ में एक भाला लिया, जो पर्वतों को भी भेद सकता था। उसमें एक सोने की छड़ और आठ घंटियाँ लगी हुई थीं। उस अत्यंत भयानक भाले ने हृदय में भय उत्पन्न कर दिया।
King! In that battle ground Yudhishthira, his eyes turning red with anger, cut those arrows of Drona and took a spear in his hand, which could pierce even the mountains. It had a gold rod and eight bells attached to it. That extremely dreadful spear created fear in the heart.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥