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mahabharat 7.106.27-28h: तत्पश्चात् वीर युधिष्ठिर ने युद्धभूमि में द्रोणाचार्य के छोड़े हुए हजारों बाणों को टुकड़े-टुकड़े कर दिया। वह अद्भुत घटना थी।   |   mahabharat अध्याय 7.106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  7.106.27-28h 
ततस्तान् सायकांस्तत्र द्रोणनुन्नान् सहस्रश:॥ २७॥
चिच्छेद समरे वीरस्तदद्भुतमिवाभवत्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वीर युधिष्ठिर ने युद्धभूमि में द्रोणाचार्य के छोड़े हुए हजारों बाणों को टुकड़े-टुकड़े कर दिया। वह अद्भुत घटना थी।
 
Thereafter the valiant Yudhishthira broke into pieces thousands of arrows shot by Dronacharya in the battlefield. That was an amazing thing. 27 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)