श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.106.21 
तान् शरान् द्रोणमुक्तांस्तु शरवर्षेण पाण्डव:।
अवारयत धर्मात्मा दर्शयन् पाणिलाघवम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा पाण्डु नन्दन युधिष्ठिर ने अपने हाथों की चपलता दिखाकर द्रोणाचार्य के छोड़े हुए बाणों को अपनी बाणों की वर्षा से रोक दिया॥21॥
 
The virtuous Pandu Nandan Yudhishthir, showing the agility of his hands, stopped the arrows shot by Dronacharya with his rain of arrows. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)