vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन
»
श्लोक 21
श्लोक
7.106.21
तान् शरान् द्रोणमुक्तांस्तु शरवर्षेण पाण्डव:।
अवारयत धर्मात्मा दर्शयन् पाणिलाघवम्॥ २१॥
अनुवाद
धर्मात्मा पाण्डु नन्दन युधिष्ठिर ने अपने हाथों की चपलता दिखाकर द्रोणाचार्य के छोड़े हुए बाणों को अपनी बाणों की वर्षा से रोक दिया॥21॥
The virtuous Pandu Nandan Yudhishthir, showing the agility of his hands, stopped the arrows shot by Dronacharya with his rain of arrows. 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×