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mahabharat 7.106.19: भरतश्रेष्ठ! जब यशस्वी कुन्तीकुमार क्रोधित हुए, तब द्रोणाचार्य ने उनकी छाती में पच्चीस बाण मारे ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 7.106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.106.19 
तं द्रोण: पञ्चविंशत्या निजघान स्तनान्तरे।
रोषितो भरतश्रेष्ठ कौन्तेयेन यशस्विना॥ १९॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! जब यशस्वी कुन्तीकुमार क्रोधित हुए, तब द्रोणाचार्य ने उनकी छाती में पच्चीस बाण मारे ॥19॥
 
Bharatshrestha! When the famous Kuntikumar got angry, Dronacharya shot him with twenty-five arrows in his chest. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)