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mahabharat 7.106.18: भरतनन्दन! तत्पश्चात् भरतभूषण युधिष्ठिर ने धनुष को मोड़कर नब्बे बाणों द्वारा द्रोणाचार्य के समस्त मर्मस्थलों पर प्रहार किया॥18॥   |   mahabharat अध्याय 7.106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.106.18 
ततो युधिष्ठिरो द्रोणं नवत्या नतपर्वणाम्।
आजघ्ने भरतश्रेष्ठ: सर्वमर्मसु भारत॥ १८॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! तत्पश्चात् भरतभूषण युधिष्ठिर ने धनुष को मोड़कर नब्बे बाणों द्वारा द्रोणाचार्य के समस्त मर्मस्थलों पर प्रहार किया॥18॥
 
Bharatnandan! Thereafter, Bharatbhushan Yudhishthir struck all the core parts of Dronacharya with ninety arrows with bent bows. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)