vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन
»
श्लोक 14
श्लोक
7.106.14
सात्यकिं तु नरव्याघ्रं व्याघ्रदत्तस्त्ववारयत्।
शरै: सुनिशितैस्तीक्ष्णै: कम्पयन् वै मुहुर्मुहु:॥ १४॥
अनुवाद
वहाँ व्याघ्रदत्त ने अपने अत्यंत तीखे बाणों द्वारा शत्रु सेना को बार-बार हिलाकर नरसिंह सात्यकि को आगे बढ़ने से रोक दिया ॥14॥
There Vyaghradatta, by repeatedly shaking the enemy army with his extremely sharpened arrows, prevented the man-lion Satyaki from advancing. ॥14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×