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mahabharat 7.106.11: तत्पश्चात् विजय की इच्छा रखने वाले पराक्रमी द्रोणाचार्य ने सेना सहित खड़े हुए राजा युधिष्ठिर को आगे बढ़ने से रोक दिया॥11॥   |   mahabharat अध्याय 7.106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.106.11 
युधिष्ठिरं महाराजं जिगीषुं समवस्थितम्।
सहानीकं ततो द्रोणो न्यवारयत वीर्यवान्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् विजय की इच्छा रखने वाले पराक्रमी द्रोणाचार्य ने सेना सहित खड़े हुए राजा युधिष्ठिर को आगे बढ़ने से रोक दिया॥11॥
 
Thereafter, the mighty Dronacharya, desirous of victory, stopped King Yudhishthira, who was standing with his army, from moving forward. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)