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mahabharat 7.105.6-7h: हवा से उड़ते उनके झंडे मंच पर नाचती हुई वेश्याओं जैसे प्रतीत हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.105: अर्जुन तथा कौरव-महारथियोंके ध्वजोंका वर्णन और नौ महारथियोंके साथ अकेले अर्जुनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 105: अर्जुन तथा कौरव-महारथियोंके ध्वजोंका वर्णन और नौ महारथियोंके साथ अकेले अर्जुनका युद्ध  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  7.105.6-7h 
पताकाश्च ततस्तास्तु श्वसनेन समीरिता:॥ ६॥
नृत्यमाना व्यदृश्यन्त रङ्गमध्ये विलासिका:।
 
 
अनुवाद
हवा से उड़ते उनके झंडे मंच पर नाचती हुई वेश्याओं जैसे प्रतीत हो रहे थे।
 
Their flags, driven by the wind, appeared like courtesans dancing on a stage.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)