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mahabharat 7.105.5-6h: वे अनेक रंगबिरंगी ध्वजाएँ, जो महान वैभव से परिपूर्ण थीं, चारों ओर से नाना प्रकार के रंगों की पताकाओं से घिरी हुई थीं, और बहुत सुन्दर लग रही थीं।   |   mahabharat अध्याय 7.105: अर्जुन तथा कौरव-महारथियोंके ध्वजोंका वर्णन और नौ महारथियोंके साथ अकेले अर्जुनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 105: अर्जुन तथा कौरव-महारथियोंके ध्वजोंका वर्णन और नौ महारथियोंके साथ अकेले अर्जुनका युद्ध  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  7.105.5-6h 
अनेकवर्णा विविधा ध्वजा: परमशोभना:।
ते ध्वजा: संवृतास्तेषां पताकाभि: समन्तत:॥ ५॥
नानावर्णविरागाभि: शुशुभु: सर्वतो वृता:।
 
 
अनुवाद
वे अनेक रंगबिरंगी ध्वजाएँ, जो महान वैभव से परिपूर्ण थीं, चारों ओर से नाना प्रकार के रंगों की पताकाओं से घिरी हुई थीं, और बहुत सुन्दर लग रही थीं।
 
Those many colourful flags, full of great splendour, were surrounded on all sides by banners of various colours, looking very beautiful. 5 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)