श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 105: अर्जुन तथा कौरव-महारथियोंके ध्वजोंका वर्णन और नौ महारथियोंके साथ अकेले अर्जुनका युद्ध  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  7.105.38 
संवृते नरसिंहैस्तु कुरूणामृषभेऽर्जुने।
महानासीत् समुद्भूतस्तस्य सैन्यस्य नि:स्वन:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
जब कौरवों में श्रेष्ठ अर्जुन उन सिंह-पुरुषों से घिर गए, तब सेना में बड़ा कोलाहल मच गया।
 
When the best of the Kurus, Arjuna, was surrounded by those lion-men, a great uproar arose in the army. 38
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि ध्वजवर्णने पञ्चाधिकशततमोऽध्याय:॥ १०५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें ध्वजवर्णनविषयक एक सौ पाँचवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)