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mahabharat 7.105.35-36h: उन पर विजय पाने की इच्छा से तथा विशाल भुजाओं वाले सिंह-पुरुष जयद्रथ को मारने की इच्छा से, अर्जुन ने जब गांडीव धनुष खींचा तो वह बहुत ही सुन्दर लग रहा था।   |   mahabharat अध्याय 7.105: अर्जुन तथा कौरव-महारथियोंके ध्वजोंका वर्णन और नौ महारथियोंके साथ अकेले अर्जुनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.105.35-36h 
अशोभत महाबाहुर्गाण्डीवं विक्षिपन् धनु:॥ ३५॥
जिगीषुस्तान् नरव्याघ्रो जिघांसुश्च जयद्रथम्।
 
 
अनुवाद
उन पर विजय पाने की इच्छा से तथा विशाल भुजाओं वाले सिंह-पुरुष जयद्रथ को मारने की इच्छा से, अर्जुन ने जब गांडीव धनुष खींचा तो वह बहुत ही सुन्दर लग रहा था।
 
Desiring to conquer them and wanting to kill Jayadratha, the lion-man with great arms, Arjuna looked very handsome as he pulled the Gandiva bow. 35 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)