Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.105.34-35h: वहाँ श्रीकृष्ण के सारथी कुन्तीपुत्र अर्जुन ने ऐसा अद्भुत पराक्रम दिखाया कि वह अकेले ही निर्भय होकर अनेकों के विरुद्ध युद्ध करने लगा ॥34 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.105: अर्जुन तथा कौरव-महारथियोंके ध्वजोंका वर्णन और नौ महारथियोंके साथ अकेले अर्जुनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 105: अर्जुन तथा कौरव-महारथियोंके ध्वजोंका वर्णन और नौ महारथियोंके साथ अकेले अर्जुनका युद्ध  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  7.105.34-35h 
तत्राद्भुतं परं चक्रे कौन्तेय: कृष्णसारथि:॥ ३४॥
यदेको बहुभि: सार्धं समागच्छदभीतवत्।
 
 
अनुवाद
वहाँ श्रीकृष्ण के सारथी कुन्तीपुत्र अर्जुन ने ऐसा अद्भुत पराक्रम दिखाया कि वह अकेले ही निर्भय होकर अनेकों के विरुद्ध युद्ध करने लगा ॥34 1/2॥
 
There, Kunti's son Arjun, whose charioteer was Shri Krishna, displayed such a wonderful feat that he alone without any fear started the war against many. ॥ 34 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)