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mahabharat 7.105.27-28h: प्रजानाथ! वह विचित्र ध्वज दुर्योधन के उत्तम रथ पर सैकड़ों छोटी-छोटी घंटियों की ध्वनि से सुशोभित हो रहा था। उस समय कौरवों में श्रेष्ठ आपका पुत्र दुर्योधन उस महान ध्वज से रणभूमि में अत्यन्त सुशोभित हो रहा था। 27 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.105: अर्जुन तथा कौरव-महारथियोंके ध्वजोंका वर्णन और नौ महारथियोंके साथ अकेले अर्जुनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.105.27-28h 
किंकिणीशतसंह्रादो भ्राजंश्चित्रो रथोत्तमे।
व्यभ्राजत भृशं राजन् पुत्रस्तव विशाम्पते॥ २७॥
ध्वजेन महता संख्ये कुरूणामृषभस्तदा।
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! वह विचित्र ध्वज दुर्योधन के उत्तम रथ पर सैकड़ों छोटी-छोटी घंटियों की ध्वनि से सुशोभित हो रहा था। उस समय कौरवों में श्रेष्ठ आपका पुत्र दुर्योधन उस महान ध्वज से रणभूमि में अत्यन्त सुशोभित हो रहा था। 27 1/2॥
 
Prajanath! That strange flag was adorned with the sound of hundreds of small bells on the fine chariot of Duryodhana. At that time, your son Duryodhana, the best of Kurus, was being greatly adorned in the battlefield with that great flag. 27 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)