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mahabharat 7.105.24-25: महाराज! शल्क की ध्वजा पर चाँदी का बना एक विशाल हाथी था। हे भरतश्रेष्ठ! वह ध्वज सोने के बने विचित्र शरीर वाले मयूरों से सुशोभित था और आपकी सेना की शोभा बढ़ा रहा था।   |   mahabharat अध्याय 7.105: अर्जुन तथा कौरव-महारथियोंके ध्वजोंका वर्णन और नौ महारथियोंके साथ अकेले अर्जुनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.105.24-25 
शलस्य तु महाराज राजतो द्विरदो महान्॥ २४॥
केतु: काञ्चनचित्राङ्गैर्मयूरैरुपशोभित:।
स केतु: शोभयामास सैन्यं ते भरतर्षभ॥ २५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! शल्क की ध्वजा पर चाँदी का बना एक विशाल हाथी था। हे भरतश्रेष्ठ! वह ध्वज सोने के बने विचित्र शरीर वाले मयूरों से सुशोभित था और आपकी सेना की शोभा बढ़ा रहा था।
 
Maharaj! The flag of Shalka had a huge elephant made of silver. O best of the Bharatas! That flag was decorated with peacocks with strange bodies made of gold and was enhancing the beauty of your army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)