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mahabharat 7.105.23-24h: राजन! जैसे यज्ञों में श्रेष्ठ सूर्य में ऊँचा वृक्ष सुशोभित होता है, उसी प्रकार भूरिश्रवा का सुवर्णमय वृक्ष सुशोभित था ॥23 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.105: अर्जुन तथा कौरव-महारथियोंके ध्वजोंका वर्णन और नौ महारथियोंके साथ अकेले अर्जुनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.105.23-24h 
स यूप: काञ्चनो राजन् सौमदत्तेर्विराजते॥ २३॥
राजसूये मखश्रेष्ठे यथा यूप: समुच्छ्रित:।
 
 
अनुवाद
राजन! जैसे यज्ञों में श्रेष्ठ सूर्य में ऊँचा वृक्ष सुशोभित होता है, उसी प्रकार भूरिश्रवा का सुवर्णमय वृक्ष सुशोभित था ॥23 1/2॥
 
Rajan! Just as a high tree is adorned in the sun which is the best among yagyas, the golden tree of Bhurishrava was similarly adorned. 23 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)